अरहर के खेत में चुदाई

अरहर के खेत में चुदाई

चूंचे और बहुत ही ऊंचे दर्जे के। Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories

वो नुकीले चूंचे कौन भूल सकता है भला। कालेज के दिनों में मेरे साथ पढ़ने वाली नताशा के चूंचे देख कर के लड़के आह भरते थे और टीचर मूठ मारते थे। बाथरुम की दीवालें नताशा को चोदने की फंतासियों से भरी रहती थीं। सच तो ये है कि नताशा मेरे गाँव से ही कालेज जाती थी। और अक्सर वो शाम को बस पकड़ के कालेज जाती थी। आईये आपको नताशा के बदन की पूरी ज्योग्राफिया समझा दें। चौतीस के नुकीली चूंचियां, छत्तीस की गांड अठ्ठाईस की कमर। पूरा बदन गठा कमाल का, लसलसा रस चूता होठो से और शायद उसकी भाव भंगिमाएं देख कर यही लगता था कि उसके चूत से भी रस लगातार टपकता रहता होगा। सच तो ये है कि वो ह्मेशा अपने चूत के नीचे रूई का गद्दा लगा के रखती थी जिससे कि उसकी लेगिंग्स न भीग जाएं। ये बात मुझे उसकी एक सहेली ने बताई थी और जब मुझे उसे चोदने का मौका मिला तब मैं इसे जान पाया।तो बात है ठंड के दिनों की जब मैं अपने मोटरसायकिल से कालेज गया हुआ था और उस दिन शाम के पांच बजे ही कुहरा छा गया था। इस हाल में शाम को वापस आते समय बहुत अंधेरा हो गया था। नताशा अपने बस स्टाप पर खड़ी होकर बस का इंतजार कर रही थी, पर बस नहीं आई। आज मैं उसका पीछा करने के मूड में था। बह्हुत देर हो गयी तो मैने उसको लिफ्ट आफर किया। वो खुश होकर के बैठ गयी और मैने स्पीड बढा दी।

नताशा ने मेरे कमर को जोर से कसकर पकड़ लिया था। ठंड का मौसम हवाएं सन्न सन्न छेद रहीं थीं। इसलिए उसने मुझे पीछे से पकड़ कर मेरे पीठ को एयर टाईट कर दिया। उसके मस्त नुकीले चूंचे मेरी पीठ से रगड़ कर रहे थे।

मैने पाया कि कड़ाके की ठंड में भी नताशा की पकड़ और चूंचे की चुभन से मेरे पसीने छूट रहे थे। लंड को खड़ा हो जाने की वजह से काबू करना मुश्किल हो रहा था। जींस एक दम टाईट पहले से थी। मुझे भी मौका देख कर आज उसे चोद देने का मन कर रहा था। रास्ते में एक जगह अरहर के लंबे लंबे खेत थे और मुझे लगा कि चोदने के लिए इससे बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। मैने बाईक रोकी और नताशा से कहा कि एक नम्बर से आ रहा हूं। जरा सा दूर जाकर के मैं लंड को निकाल कर मूतने लगा। खड़े और तने लंड से मूतने में बड़ा मजा आता है ऐसा लगता है कि जैसे मूत की जगह वीर्य ही निकल रहा हो। लंड में बड़ी सुरसुराहट हो रही थी और मस्ती चढ रही थी।
अरहर के खेत में नताशा की चूत का बताशा।

सोच रहा था कि कैसे नताशा को पेलूं और तभी मैने मूतते हुए ही गर्दन पीछे घुमाई तो नजारा देख दंग रह गया। मेरे ठीक पीछे वो चूत खोले मूत रही थी। मैंने लंड को पकड़ कर उसकी तरफ चेहरा घुमा लिया। उसकी खुली चूत और मेरा तना लंड दोनों से मूत की धार निकल रही थी। मेरा लंड और तन गया और फ्च्च से मूत की धार नताशा के हैरत से खुले मुह में घुस गयी। हम दोनों चुदासे थे। मैने उसको अपनी बाहों में उठाया और अरहर के खेत में लेकर के घुस गया।

अब मजा ही मजा था। उसकी सलवार पहले से नीचे सरकी हुई थी। मूत से सनी गीली चूत को मैने अपने खड़े लंड से रगड़ा तो वो और भी गीली हो गयी। लिसलिसा ग्रीज अन्दर से बाहर आने लगा। चूत चुदने के लिए चिकनी हो रही थी। हम दोनों खड़े खड़े थे। मैने उसके नुकीले चूंचों को नंगा किया और अपने मुह में लगा कर के रसास्वादन करने लगा। उसने मेरे लंड को पकड़ कर के अपने चूत के फांकों के उपर रगड़ना शुरु किया तो मेरा लौड़ा फनफना के उसकी चूत में घुसने को होने लगा। मैने उसके कमर को पकड़ कर के अपनी तरफ खींचा और उसने अपनी चूत को मेरे तने सीधे लन्ड की दिशा में कर दिया। दन्न्न और लंड अंदर घुस गया। फिर क्या मजे मजे में मेरा मोटा लंड उसकी गीली चूत के गिरफ्त में था और मेरे मुह में उसके सख्त सख्त नुकीले चूंचे। लिंग प्रवेश के बाद मैने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी और एक हाथ से उसका दायें चूंचे को। मस्त काले निप्पल को मसलते हुए मैने अपना लंड अंदर धकेल दिया और घचर पचर अंदर बाहर करने लगा। अरहर के पौधे हिलने लगे, उपर नीचे दायें बाये। मस्त चूंचे की रगड़ के साथ ही उसकी मस्ती चढती जा रही थी। मैने चोदने के साथ ही उसके चूंचे बदल बदल के चूसने जारी रखे।

धकाधक और पकापक चोदने के साथ ही मैने उसकी गांड में एक उंगली पीछे से घुसा दी। गुदाज गाँड में अंगुली जाने के साथ और चूत में मोटे लंड के घुसेड़ने से चूंचे चूसे जाने पर नताशा की जवानी बताशा की तरह वासना के ज्वार में घुलती जा रही थी। नताशा को चढती मस्ती के साथ वो अपने मुह से सेक्सी आवाजें आईई ऊउ आह्ह आह्ह फक मी चोदो मुझे चोद दो और तेज चोदो। मजे से चोदो आह्ह मजा आ रहा है। प्लीज चोद दो और मुझे जोरदार चोद दो।

मैने नताशा को अब पीछे की तरफ घुमा के पीछे से उसकी चूत में लंड घुसेड़ कर के चोदना शुरु किया और उसके दोनों चूंचे पकड़ लिए। अब पीछे से उसकी चूत में चोदते हुए मैने एक हाथ से, उसकी भगनाशा को मसलते हुए जोरदार चोदते हुए गालियां दे रहा था। ले साली रंडी फाड़ अपनी चूत मिटा अपनी वासना, चुदास। कुतिया कही की। और वो कह रही थी, चोद भड़वे, जोरदार चोद मुझे तेरे लंड में इतना ही दम है क्या।

आह्ह और मेरा लंड एक दम उत्तेजना के चरम पर पहुंच चुका था। अब मैने अपने लंड को जोरदार झटकों के साथ किनारा कर के हर कोने में पेलना शुरु किया। उसे अब गांड नचा नचा के लंड को हर कोने में लेने का मन कर रहा था। मस्त होकर के वो चुदाए जा रही थी। अब मेरा लंड एक दम फनफना के पचपचाने वाला था। मेरे पेट की नसें सिकुड़ने लगी थी। मैं झड़ने वाला था। इससे पहले कि काम बिगड़े मैने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुह और चूंचे पर वीर्य का छिड़काव कर दिया।

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